Home गीता ज्ञान अमृत/रामचरित मानस श्रीरामचरितमानस- बालकांडः ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा, अकथ अनामय नाम न रूपा

श्रीरामचरितमानस- बालकांडः ब्रह्मसुखहि अनुभवहिं अनूपा, अकथ अनामय नाम न रूपा

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