नवरात्रि 2026: कलश स्थापना शुभ मुहूर्त, तिथियां व घटस्थापना की सरल विधि
जय माता दी! माँ जगदम्बा की साधना का सबसे पावन पर्व नवरात्रि 2026 आरंभ होने जा रहा है। घर में माँ भगवती का स्वागत करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण होता है— कलश स्थापना (घटस्थापना)।
कई बार साधकों के मन में यह संकोच और भय रहता है कि पूजा की विधि बहुत कठिन है या कोई चूक न हो जाए। प्रभु शरणम् का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि धर्म और पूजा-विधान को इतना सरल बनाया जाए कि हर भक्त बिना किसी डर या उलझन के पूरे भाव से भगवती की सेवा कर सके। क्योंकि माँ भाव देखती हैं, आडंबर नहीं।
यहाँ प्रस्तुत है नवरात्रि कलश स्थापना विधि 2026 की संपूर्ण और सरल गाइड (रेडी रेक्नर), जिसे पढ़कर आप स्वयं अपने घर में पूर्ण विधि-विधान से घटस्थापना कर सकते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2026 तिथियां
शारदीय नवरात्रि 2026 का आरंभ 11 अक्टूबर 2026, दिन रविवार से हो रहा है और समापन 20 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार को विजयादशमी के साथ होगा।
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11 अक्टूबर 2026 (रविवार): प्रतिपदा — घटस्थापना एवं माँ शैलपुत्री पूजा
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12 अक्टूबर 2026 (सोमवार): द्वितीया — माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
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13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): तृतीया — माँ चंद्रघंटा पूजा
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14 अक्टूबर 2026 (बुधवार): चतुर्थी — माँ कूष्मांडा पूजा
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15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार): पंचमी — माँ स्कंदमाता पूजा
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16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार): षष्ठी — माँ कात्यायनी पूजा
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17 अक्टूबर 2026 (शनिवार): सप्तमी — माँ कालरात्रि पूजा
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18 अक्टूबर 2026 (रविवार): महाअष्टमी — माँ महागौरी पूजा (दुर्गा अष्टमी)
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19 अक्टूबर 2026 (सोमवार): महानवमी — माँ सिद्धिदात्री पूजा (हवन व कन्या पूजन)
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20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): विजयादशमी — नवरात्रि पारण, प्रतिमा विसर्जन व दशहरा
नवरात्रि 2026: कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शास्त्रों के अनुसार कलश स्थापना हमेशा शुभ चौघड़िया या अभिजित मुहूर्त में करनी चाहिए। शारदीय नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना शुभ मुहूर्त का समय इस प्रकार है:
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प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त: सुबह 06:21 बजे से 08:35 बजे तक
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अभिजित मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 11:45 बजे से 12:32 बजे तक
सरल समाधान: यदि किसी कारणवश आप सुबह जल्दी घटस्थापना न कर पाएँ, तो बिल्कुल परेशान न हों। दोपहर के अभिजित मुहूर्त (11:45 से 12:32) में कलश स्थापित करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
नवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट (चेकलिस्ट)
पूजा शुरू करने से पहले यह नवरात्रि पूजन सामग्री लिस्ट तैयार कर लें:
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वेदी व कलश के लिए: शुद्ध मिट्टी, एक मिट्टी का चौड़ा पात्र (सकोरा), जौ (यव), तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश, रक्षासूत्र (मौली), गंगाजल।
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पल्लव व नारियल: आम या अशोक के 5 या 7 पत्ते, एक जटा वाला सूखा नारियल, लाल चुनरी या कलावा, एक कटोरी में चावल (पूर्णपात्र)।
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कलश के अंदर डालने के लिए: एक सुपारी, सिक्का (चांदी या तांबे का), थोड़ी दूर्वा, अक्षत, रोली और थोड़ा इत्र।
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माँ की पूजा के लिए: चौकी, लाल कपड़ा, माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति, सिन्दूर, कुमकुम, धूप, घी का दीपक, कपूर, फल, बताशे/मिठाई, लौंग, इलायची, पान का पत्ता और लाल फूल (गुड़हल सबसे प्रिय है)।
नवरात्रि घटस्थापना विधि (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)

घटस्थापना को आप इन 5 आसान चरणों में पूरा कर सकते हैं:
1. वेदी बनाना और जौ बोना
घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या पूजा घर को साफ कर गंगाजल छिड़कें। लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। मिट्टी के चौड़े पात्र में थोड़ी शुद्ध मिट्टी बिछाएँ, उसमें जौ डालें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डालकर हल्के हाथ से जल का छिड़काव करें।
2. कलश तैयार करना
कलश के कंठ (गर्दन) पर तीन बार मौली लपेटकर बाँधें। कलश पर रोली या कुमकुम से शुभ स्वास्तिक का चिह्न बनाएँ और कलश में शुद्ध जल व थोड़ा गंगाजल मिलाएँ।
3. कलश के अंदर सामग्री डालना
जल भरे कलश के अंदर एक सुपारी, एक सिक्का, थोड़ी दूर्वा, अक्षत और चुटकी भर रोली डालें।
4. पल्लव और नारियल स्थापित करना
कलश के मुख पर आम या अशोक के 5 पत्ते इस प्रकार रखें कि पत्तों का आधा हिस्सा पानी में रहे और आधा बाहर। पत्तों के ऊपर चावल से भरी हुई कटोरी (पूर्णपात्र) रखें। नारियल पर लाल चुनरी या मौली लपेटें और उसे उस चावल की कटोरी के ऊपर इस तरह रखें कि नारियल का मुख आपकी तरफ या ऊपर की ओर रहे।
5. कलश को वेदी पर रखना व आह्वान
अब इस तैयार कलश को जौ बोए हुए मिट्टी के पात्र के ठीक बीचों-बीच स्थापित कर दें। हाथ जोड़कर प्रार्थना करें: “हे वरुण देव, हे माँ भगवती और समस्त देवी-देवता! आप इस कलश में नौ दिनों के लिए पधारें और हमारी पूजा स्वीकार करें।” इसके बाद कलश के सामने घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएँ।
नवरात्रि 2026 पूजन की संक्षिप्त व सरल दैनिक विधि
कलश स्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम इस सरल क्रम से पूजा करें:
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प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण: हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर भगवान गणेश का ध्यान करें और उन्हें प्रणाम करें।
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माता का पूजन: माँ दुर्गा की प्रतिमा को रोली-चन्दन का तिलक लगाएँ, अक्षत और लाल पुष्प अर्पित करें।
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भोग व आरती: माता को फल और मिठाई या बताशे का भोग लगाएँ। दो लौंग और बताशा माता को अति प्रिय है।
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मंत्र जप: कम से कम 11, 21 या 108 बार माँ के नर्वाण मंत्र का जप करें:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
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सप्तशती पाठ का सरल विकल्प: यदि आपके पास संपूर्ण पाठ का समय न हो, तो आप हमारी यह विशेष विधि पढ़ सकते हैं:
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण और शॉर्टकट दोनों
ऋषियों के अनुसार इसमें संपूर्ण सप्तशती का फल समाहित है।
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आरती व क्षमा प्रार्थना: अंत में माँ दुर्गा की कपूर या घी के दीपक से आरती करें और अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँग लें।
नवरात्रि 2026ः साधकों के लिए जरूरी सावधानियां व शंका-समाधान (FAQ)

Q1. क्या बिना पंडित जी के स्वयं कलश स्थापना कर सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल कर सकते हैं। सनातन धर्म में ‘भाव’ सर्वोपरि है। यदि आप शुद्ध हृदय से ऊपर बताई गई विधि से स्वयं कलश स्थापित करते हैं, तो माँ भगवती उसे सहर्ष स्वीकार करती हैं।
Q2. यदि घटस्थापना के बाद परिवार में कोई सूतक हो जाए तो क्या करें?
उत्तर: यदि कलश स्थापना से पहले सूतक लग जाए तो पूजा नहीं की जाती। परंतु यदि कलश स्थापित हो चुका है और उसके बाद सूतक होता है, तो कलश और अखंड ज्योति को हटाया नहीं जाता; घर का कोई बाहरी व्यक्ति या मित्र दीप में घी डाल सकता है।
Q3. यदि पूरे 9 दिन का उपवास न कर सकें तो क्या करें?
उत्तर: जो साधक नौ दिनों तक व्रत रखने में असमर्थ हैं, वे केवल पहले दिन (प्रतिपदा) और अंतिम दिन (अष्टमी या नवमी) का व्रत रखकर भी नवरात्रि का पूर्ण पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं।
Q4. अखंड ज्योति जलाना अनिवार्य है क्या?
उत्तर: नहीं, अखंड ज्योति संकल्प पर आधारित होती है। यदि आप घर पर 24 घंटे ध्यान नहीं रख सकते, तो केवल सुबह और शाम पूजा के समय साधारण घी या तिल के तेल का दीपक जलाना भी पूर्ण फलदायी है।
नवरात्रि हवनः घर में भी और खुद कर सकते हैं
शारदीय नवरात्रि 2026 की यह पोस्ट आपको कैसी लगी? अपने विचार लिखिएगा. यह पोस्ट श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ में बताई गई विधियों का सरल शब्दों में संकलन मात्र है. इसका उद्देश्य आपको जानकारी देना मात्र है. आप संपूर्ण पुष्ट जानकारी के लिए श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को देखें.
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